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Men's HWC 2018: ​​दिलीप टिर्की ने कहा- भारत 43 साल बाद पदक जीतने का दावेदार

कभी भारतीय हॉकी की दीवार कहे जाने वाले डिफेंडर दिलीप टिर्की को अपने करियर में ओलंपिक और विश्व कप में पदक नहीं जीत पाने का मलाल है। लेकिन उन्हें इस बात की उम्मीद है कि उनके शहर में पहली बार हो रहे हॉकी विश्व कप में भारतीय टीम 43 साल बाद पदक जीतने में कामयाब रहेगी। भारत ने एकमात्र विश्व कप 1975 में जीता था और उसके बाद से आठ बार की ओलंपिक चैम्पियन टीम पदक जीतने में नाकाम रही। खिताब जीतने से पहले 1973 में भारत ने रजत और 1971 में कांस्य पदक जीता था। पिछली बार 2014 में हुए विश्व कप में भारत नौवें और 2010 में दिल्ली में हुए विश्व कप में आठवें स्थान पर रहा था।
    
'भारतीय टीम इस बार जीत सकती है पदक'  
पूर्व कप्तान टिर्की ने भाषा को दिए इंटरव्यू में कहा,'मैं अपने करियर ग्राफ से खुश हूं लेकिन यही दुख है कि ओलंपिक या विश्व कप नहीं जीत सका। मेरे खेलने के दिनों में हमने एशियाई स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया। मुझे ओलंपिक में कप्तानी का मौका मिला। चैम्पियंस ट्रॉफी में चौथे और ओलंपिक में सातवें स्थान पर रहे जबकि एफ्रो एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता। इस बार मुझे लगता है कि हमारे पास पदक जीतने का सुनहरा मौका है। कलिंगा स्टेडियम पर 15000 दर्शक जब भारतीय टीम की हौसलाफजाई करेंगे तो अच्छे प्रदर्शन की अतिरिक्त प्रेरणा मिलेगी।' हॉकी विश्व कप 28 नवंबर से 16 दिसंबर तक भुवनेश्वर के लिंगा स्टेडियम में खेला जाएगा जिसमें 16 टीमें भाग ले रही हैं।
  
'सरदार सिंह के संन्यास का फैसला हैरानी भरा'

टिर्की ने कहा ,'भारतीय टीम का आक्रमण बहुत अच्छा है। मनप्रीत, मनदीप और आकाशदीप बेहतरीन स्ट्राईकर्स हैं। पी आर श्रीजेश की अगुवाई में डिफेंस भी अच्छा है। चैम्पियंस ट्रॉफी में जिस तरह तालमेल से खेले, उसी तरह सीनियर जूनियर टीम का अच्छा संयोजन रहने पर हम पदक जीत सकते हैं।' अनुभवी मिडफील्डर सरदार सिंह को नहीं चुने जाने और उनके हॉकी से संन्यास को हैरानी भरा बताते हुए दिलीप टिर्की ने कहा कि टीम को सरदार की जरूरत थी।सरदार खेल सकता था और बस एक महीने की बात थी। मुझे भी हैरानी है कि वह इस तरह से बाहर हुआ। टीम को उसके हुनर और अनुभव की जरूरत थी।Indian Men's Hockey Team.jpg

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महात्मा गांधी   मोहनदास करमचन्द गांधी जन्म २ अक्टूबर १८६९ पोरबंदर , काठियावाड़ , गुजरात , भारत मृत्यु ३० जनवरी १९४८ (७८ वर्ष की आयु में) नई दिल्ली , भारत मृत्यु का कारण हत्या राष्ट्रीयता भारतीय अन्य नाम राष्ट्रपिता, महात्मा, बापू, गांधीजी शिक्षा यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन प्रसिद्धि कारण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, सत्याग्रह, अहिंसा, शांति राजनैतिक पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस हस्ताक्षर मोहनदास करमचन्द गांधी ( २ अक्टूबर १८६९ - ३० जनवरी १९४८ ) भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह (व्यापक सविनय अवज्ञा) के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे, उनकी इस अवधारणा की नींव सम्पूर्ण अहिंसा के सिद्धान्त पर रखी गयी थी जिसने भारत को आजादी दिलाकर पूरी दुनिया में जनता के नागरिक अधिकारों एवं स्वतन्त्रता के प्रति आन्दोलन के लिये प्रेरित किया। उन्हें दुनिया में आम जनता महात्मा गांधी के नाम से जानती है। संस्कृत भाषा में महात्मा अथवा महान आत...