आईएलएफएस को संपत्ति बेचकर बचाने की तैयारी
कर्ज संकट में फंसे आईएलएफएस समूह को बचाने के लिए तत्काल उसकी कुछ संपत्तियों को बेचा जाएगा। इसको लेकर केंद्र और कंपनी के नए बोर्ड के बीच सहमति बन गई है।
सरकार और बोर्ड की कोशिश है कि संपत्ति बेचकर छह माह के अंदर आईएलएफएस को पटरी पर ले आया जाए। सूत्रों का कहना है कि संपत्ति बेचने के कुछ प्रस्ताव बोर्ड के पास पहुंच भी गए हैं और उन पर तत्काल निर्णय हो सकता है। आईएलएफएस समूह के पास हाईवे, टोल ब्रिज, विद्युत परियोजना और ट्रांसमिशन नेटवर्क से जुड़ी परिसंपत्तियां हैं। कंपनी के ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क के पास समूह की भारत और विदेश में स्थित संपत्ति में भी 40 फीसदी हिस्सेदारी है।
दरअसल, गैर र्बैंंकग वित्तीय कंपनी के दायरे में आने वाले आईएलएफएस समूह की कंपनियां कर्ज न चुका पाने के बाद दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गया था। इससे शेयर बाजार से लेकर म्यूचुअल फंड कारोबार हिल गया था। साथ ही कंपनी को 30 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा कर्ज देने वाले बैंकों पर भी संकट आ खड़ा हुआ था, लिहाजा केंद्र सरकार तुरंत हरकत में आई और एनसीएलटी से तत्कालीन बोर्ड को भंग कराने की मंजूरी लेकर नया बोर्ड गठित कराया। समूह राइट्स इश्यू के जरिये 4500 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है, जबकि एलआईसी और एसबीआई 3500 करोड़ रुपये का कर्ज दे सकते हैं।
अस्थिरता का माहौल नहीं चाहती सरकार
आईएलएफएस के दिवालिया होने की स्थिति में बाजार पर पड़ने वाले असर से सरकार वाकिफ है। सरकार बाजार में अस्थिरता और घबड़ाहट का माहौल नहीं चाहती। आईएलएफएस में एलआईसी की 23.5% हिस्सेदारी है। एसबीआई, एचडीएफसी, सेंट्रल बैंक और ओरिक्स कारपोरेशन की भी इसमें बड़ी अंशधारिता है। इन बैंकों या वित्तीय संस्थानों की माली हालत भी बिगड़ने नहीं देना चाहती
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