2019 लोकसभा चुनाव से पहले जदयू ने देश के प्रमुख सियासी रणनीतिकार
प्रशांत किशोर (पीके) को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया है।
पार्टी प्रवक्ता केसी त्यागी ने आज (मंगलवार) इस बात की घोषणा की है।
प्रशांत किशोर को 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी और 2015 के बिहार विधानसभा
चुनाव में नीतीश-लालू की जोड़ी के लिए चुनाव प्रचार की रणनीति बनाई थी, जो
बेहद की सफल रही थी। दोनों बार इन्होंने पार्टियों की जीत में अहम भूमिका
निभाई। आइए प्रशांत किशोर से जुड़ी 10 खास बातें जानते हैं।
प्रशांत किशोर से जुड़ी 10 खास बातें...
1. प्रशांत किशोर का जन्म 1977 में बिहार के बक्सर जिले में हुआ। वह इस समय 41 साल के हैं।
2. प्रशांत किशोर के पिता डॉ. श्रीकांत पांडे पेशे से डॉक्टर हैं और बक्सर में मेडिकल सुपरिटेंडेंट भी रह चुके हैं। जबकि उनकी मां इंदिरा पांडे एक ग्रहणी हैं।
3. प्रशांत किशोर के एक भाई और दो बहने हैं। बड़े भाई अजय किशोर का खुद का कारोबार है।
4. प्रशांत ने पढ़ाई के बाद यूनिसेफ में ब्रैंडिंग का जिम्मा संभाला।
5. साल 2011 में पीके ने भारत लौटने के बाद गुजरात के चर्चित आयोजन 'वाइब्रेंट गुजरात' की ब्रांडिंग का जिम्मा संभाला। इस आयोजन के बाद ही वे नरेंद्र मोदी के काफी करीबी बन गए।
6. 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद प्रशांत किशोर की पहचान बनी। इन्होंने भाजपा समेत एनडीए की बड़ी जीत में अहम भूमिका निभाई।
7. 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए प्रमुख प्रचार 'चाय पर चर्चा' और 'थ्री डी नरेंद्र मोदी' का कांसेप्ट दिया। इसके साथ ही 'मोदी लहर' और 'अबकी बार मोदी सरकार' का नारा भी इन्होंने दिया।
8. 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने एनडीए को छोड़कर नीतीश-लालू की जोड़ी के लिए प्रचार किया और उन्हें जीत दिलवाई।
9. प्रशांत ने कुछ समय पहले ही जदयू राज्य कार्यकारणी की बैठक में नीतीश कुमार के समक्ष जेडीयू की सदस्यता ली थी।
10. प्रशांत किशोर अब जदयू के उपाध्यक्ष बन गए हैं और शायद आने वाले चुनावों में हाथ भी आजमा सकते हैं।

1. प्रशांत किशोर का जन्म 1977 में बिहार के बक्सर जिले में हुआ। वह इस समय 41 साल के हैं।
2. प्रशांत किशोर के पिता डॉ. श्रीकांत पांडे पेशे से डॉक्टर हैं और बक्सर में मेडिकल सुपरिटेंडेंट भी रह चुके हैं। जबकि उनकी मां इंदिरा पांडे एक ग्रहणी हैं।
3. प्रशांत किशोर के एक भाई और दो बहने हैं। बड़े भाई अजय किशोर का खुद का कारोबार है।
4. प्रशांत ने पढ़ाई के बाद यूनिसेफ में ब्रैंडिंग का जिम्मा संभाला।
5. साल 2011 में पीके ने भारत लौटने के बाद गुजरात के चर्चित आयोजन 'वाइब्रेंट गुजरात' की ब्रांडिंग का जिम्मा संभाला। इस आयोजन के बाद ही वे नरेंद्र मोदी के काफी करीबी बन गए।
6. 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद प्रशांत किशोर की पहचान बनी। इन्होंने भाजपा समेत एनडीए की बड़ी जीत में अहम भूमिका निभाई।
7. 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए प्रमुख प्रचार 'चाय पर चर्चा' और 'थ्री डी नरेंद्र मोदी' का कांसेप्ट दिया। इसके साथ ही 'मोदी लहर' और 'अबकी बार मोदी सरकार' का नारा भी इन्होंने दिया।
8. 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने एनडीए को छोड़कर नीतीश-लालू की जोड़ी के लिए प्रचार किया और उन्हें जीत दिलवाई।
9. प्रशांत ने कुछ समय पहले ही जदयू राज्य कार्यकारणी की बैठक में नीतीश कुमार के समक्ष जेडीयू की सदस्यता ली थी।
10. प्रशांत किशोर अब जदयू के उपाध्यक्ष बन गए हैं और शायद आने वाले चुनावों में हाथ भी आजमा सकते हैं।

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