शिष्या से यौन शोषण मामले में आरोपी स्वयंभू उपदेशक दाती महाराज ने उनके
खिलाफ दर्ज मामले की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने के
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
हाईकोर्ट ने तीन अक्टूबर को इस मामले में दाती महाराज को गिरफ्तार नहीं करने पर दिल्ली पुलिस को आड़े हाथ लिया था और इस मामले को केन्द्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दिया था। दाती महाराज की याचिका 22 अक्टूबर को जस्टिस एन.वी. रमण और जस्टिस एम.एम. शांतानागौडर की बैंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
न्यूज एजेंसी भाषा के अनुसार, दाती मदन लाल उर्फ दाती महाराज के खिलाफ
सात जून को एक महिला द्वारा यौन शोषण की शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस मामले
में 11 जून को एफआईआर दर्ज हुई थी। पुलिस ने 22 जून को आरोपी से पूछताछ की
थी। दाती महाराज की एक शिष्या ने उन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने दिल्ली
और राजस्थान में अपने आश्रमों में उसके साथ बलात्कार किया है। आरोपी ने इन
आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया है कि इसमें उसे फंसाया गया है।
दक्षिण दिल्ली के फतेहपुर बेरी थाने में दाती महाराज और उनके तीन भाइयों और एक महिला के खिलाफ यह शिकायत दर्ज कराई गई थी। बाद में इसकी जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई थी। हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच पर असंतोष व्यक्त करते हुए इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया था। दूसरी ओर, पुलिस ने दावा किया था कि महिला के बयान में विसंगतियां और विरोधाभास होने की वजह से ही दाती महाराज को गिरफ्तार नहीं किया गया।
पुलिस का कहना था कि शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी ने एक अन्य महिला का भी यौन शोषण किया था परंतु पूछताछ के दौरान उसने इससे इनकार किया था। इससे पहले, एक निचली अदालत ने भी इस मामले की जांच के तरीके पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया था। अदालत ने कहा था कि जांच अधिकारी इस बात का जवाब नहीं दे सके कि उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए क्या प्रयास किए थे कि जांच के दौरान आरोपी फरार नहीं हो सके।

हाईकोर्ट ने तीन अक्टूबर को इस मामले में दाती महाराज को गिरफ्तार नहीं करने पर दिल्ली पुलिस को आड़े हाथ लिया था और इस मामले को केन्द्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दिया था। दाती महाराज की याचिका 22 अक्टूबर को जस्टिस एन.वी. रमण और जस्टिस एम.एम. शांतानागौडर की बैंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
दक्षिण दिल्ली के फतेहपुर बेरी थाने में दाती महाराज और उनके तीन भाइयों और एक महिला के खिलाफ यह शिकायत दर्ज कराई गई थी। बाद में इसकी जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई थी। हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच पर असंतोष व्यक्त करते हुए इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया था। दूसरी ओर, पुलिस ने दावा किया था कि महिला के बयान में विसंगतियां और विरोधाभास होने की वजह से ही दाती महाराज को गिरफ्तार नहीं किया गया।
पुलिस का कहना था कि शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी ने एक अन्य महिला का भी यौन शोषण किया था परंतु पूछताछ के दौरान उसने इससे इनकार किया था। इससे पहले, एक निचली अदालत ने भी इस मामले की जांच के तरीके पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया था। अदालत ने कहा था कि जांच अधिकारी इस बात का जवाब नहीं दे सके कि उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए क्या प्रयास किए थे कि जांच के दौरान आरोपी फरार नहीं हो सके।

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