बीमारियों
के इलाज में खर्च के लिए अक्सर हम ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस या पर्सनल कवर
वाली मेडिक्लेम पॉलिसी लेते हैं। लेकिन हृदय रोग या कैंसर जैसी गंभीर
बीमारी हो जाए तो मेडिक्लेम पर्याप्त नहीं होता। विशेषज्ञों का कहना है कि
युवाओं में भी हृदय रोग, कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। भारत में पिछले 25
वर्ष में हृदय रोगों की संख्या दोगुनी हो गई है। खराब जीवनशैली के कारण 25
प्रतिशत हृदय रोगी 40 वर्ष से कम आयु के हैं। ऐसे में गंभीर बीमारियों के
लिए विशेष प्लान लेना फायदेमंद हैं।
गंभीर बीमारी पर भारी खर्च
गंभीर बीमारी की जांच, सर्जरी, चेकअप या
लंबे समय की कंसल्टेशन सर्विस में 20 से 25 लाख रुपये तक का खर्च आता है।
अवीवा हेल्थ लाइफ इंश्योरेंस की चीफ कस्टमर एंड डिजिटल अधिकारी अंजलि
मल्होत्रा ने हृदय रोग का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें एंजियोप्लास्टी,
कोरोनरी वॉल्व में खराब जैसे 19 अलग तरह की मुश्किलें आ सकती हैं। इनमें से
कई मेडिक्लेम में कवर नहीं होते या उनका खर्च कई गुना ज्यादा होता है। ऐसे
में भारी बोझ आम आदमी पर आता है।
मेडिक्लेम में लंबी प्रक्रिया
मेडिक्लेम में हास्पिटल नेटवर्क, टीपीए
अप्रूवल की लंबी प्रक्रिया होती है। इसमें अमूमन 3-5 लाख रुपये का ही
मेडिक्लेम होता है। आप किसी भी मनपंसद जगह इलाज नहीं करा सकते। ऐसे में 80
फीसदी इलाज का खर्च खुद वहन करना पड़ता है।
फिक्स्ड पेआउट फ्लान बेहतर विकल्प
मल्होत्रा के मुताबिक, हृदय रोग जैसे
मामले में डेडीकेटेड फिक्स्ड पेआउट प्लान बेहतर विकल्प है। इसमें जांच,
इलाज, सर्जरी से लेकर लाइफस्टाइल तक कवर होता है। देश-विदेश कहीं भी इलाज
कराने की सुविधा मिलती है। नौकरी छूट जाए तो प्रीमियम वेवर यानी प्रीमियम
से छूट मिल जाती है। बीमारी की प्रकृति के हिसाब से कई बार पैसा निकाल सकते
हैं।
50 लाख रुपये तक का कवर
डेडीकेटेड प्लान 28 से 65 वर्ष तक के
व्यक्ति को 10 से 50 लाख रुपये तक का कवरेज देता है। इसमें
माइल्ड(सामान्य), मॉडरेट से मेजर(गंभीर स्तर) तक की बीमारी कवर होती है।
मान लीजिए, अगर 20 लाख का कवर है तो माइल्ड में 5 लाख, मॉडरेट में दस लाख
और मेजर में 20 लाख रुपये मिलता है। पहले माइल्ड कंडीशन में 5 लाख रुपये
खर्च आते हैं और दोबारा जरूरत पड़ती है तो फिर क्लेम ले सकते हैं।
180 दिनों का पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन कवर
पॉलिसीबाजार के जनरल इंश्योरेंस के मुख्य
कारोबार अधिकारी तरुण माथुर का कहना है कि पॉलिसी विशेष में 90 दिनों का
प्री हास्पिटलाइजेशन और 180 दिनों का पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन कवरेज मिलता है।
इसमें जांच, उपचार से लेकर सभी तरह के चिकित्सा खर्च कवर होते हैं। कैशलेस
हॉस्पिटल नेटवर्क का भी ध्यान रखना भी जरूरी है।
चिकित्सा क्षेत्र में भी महंगाई
विशेषज्ञों का कहना है कि चिकित्सा
क्षेत्र में भी महंगाई साल दर साल बढ़ रही है और 2016 में यह 12.5 फीसदी
रही है, जो औसतन वेतन वृद्धि से ज्यादा है। ऐसे में अपने या परिवार की
सुरक्षा के लिए डेडीकेटेड प्लान लेना बढ़िया विकल्प है।
ऐसे समझें प्लान
अवीवा हार्ट केयर : 4585 रुपये
आईसीआईसीआई कार्डियो : 5594 रुपये
एक्साइड कार्डियो : 5119 रुपये
मेटलाइफ कार्डियो : 12,165 रुपये
(सम एश्योर्ड 10 लाख, अवधि 20 साल)

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें