कच्चे तेल में गिरावट के बावजूद रुपये में
डॉलर के मुकाबले गिरावट लगातार जारी है। रुपया गुरुवार को डॉलर के मुकाबले
24 पैसे गिरकर 74.45 के अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी प्रमुख वजह आयातकों की तरफ से डॉलर की मांग
बढ़ना और घरेलू शेयर बाजार का अचानक लुढ़कना है। विदेशी मुद्रा विनिमय
बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपया 74.37 पर खुला और जल्दी ही लुढ़कर कर
74.45 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। शुरूआती कारोबार में रुपया 24
पैसे लुढ़का।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि
आयातकों की तरफ से डॉलर की मांग बढ़ने, राजकोषीय घाटा बढ़ने के डर और
विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी बाहर ले जाने का रुपया पर दबाव पड़ा। बुधवार
को रुपया 18 पैसे टूट कर डॉलर के मुकाबले 74.21 के स्तर पर बंद हुआ था।
14 फीसदी गिर चुका है रुपया इस साल
रुपया इस साल डॉलर के मुकाबले करीब 14 फीसदी टूट चुका है। जनवरी 2018 में इसकी शुरुआत 63.46 से हुई थी और आज यह करीब 11 रुपये नीचे आ चुका है। पिछले एक माह में ही रुपया करीब दो रुपये की गिरावट झेल चुका है। यह एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन वाली मुद्रा बन गई है।
रुपया इस साल डॉलर के मुकाबले करीब 14 फीसदी टूट चुका है। जनवरी 2018 में इसकी शुरुआत 63.46 से हुई थी और आज यह करीब 11 रुपये नीचे आ चुका है। पिछले एक माह में ही रुपया करीब दो रुपये की गिरावट झेल चुका है। यह एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन वाली मुद्रा बन गई है।
कच्चा तेल 86 से 82 डॉलर प्रति बैरल हुआ
अमेरिका में 97.5 लाख बैरल के कच्चे तेल के बड़े भंडार से आपूर्ति शुरू होने के बाद कच्चा तेल पांच अक्तूबर को 86 डॉलर से गुरुवार को 82.7 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। कच्चे तेल के उत्पादक देशों के संगठन ओपेक के प्रमुख के बयान से भी तेल में नरमी आई है। ओपेक महासचिव मोहम्मद बरकिंडो ने कहा है कि तेल आपूर्ति में कोई कमी नहीं है और बाजार पर बाहरी कारणों से असर पड़ा है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें