सैन्य बलों में जासूसी कांडों, हनी ट्रैप जैसी घटनाओं की रोकथाम के लिए
भर्ती प्रक्रिया को चौकस बनाने की तैयारी चल रही है। इसके तहत भर्ती के समय
जवानों की वफादारी को भी परखा जाएगा। नियुक्ति से पूर्व विशेषज्ञों द्वारा
परखा जाएगा कि जवान वास्तव में देश की सेवा के लिए आ रहे हैं या महज
रोजगार या पैसा कमाने के उद्देश्य से?
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार सभी बलों में भर्ती होने वाले जवानों के लिए इस व्यवस्था को लागू किया जा रहा है। हाल में वायुसेना में जवानों की भर्ती के लिए इसका क्रियान्वयन शुरू कर दिया गया है। सूत्रों का दावा है कि अगले चरण में थल सेना एवं नौसेना में भी भर्ती के नियमों में आवश्यक बदलाव कर इसे शामिल किया जाएगा।
वायुसेना से जुड़े सूत्रों ने कहा कि लिखित परीक्षा पास करने, चिकित्सकीय परीक्षा पूरी होने के बाद तीसरे चरण में उम्मीदवारों को एक विशेषज्ञ पैनल के समक्ष पेश होना पड़ता है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी तथा मानसिक विशेषज्ञ भी मौजूद रहते हैं, उसमें जवानों से खासतौर से ऐसे सवाल-जवाब किए जाते हैं, जिससे सैन्य बलों में शामिल होने का उसका मकसद जाना जा सके। प्रश्नों के जरिये ही यह भी परखा जाता है कि क्या वह पैसे की लालच में या हनी ट्रैप में फंस सकता है या नहीं।
तीन कसौटियों पर परख की जाएगी
एक अधिकारी ने बताया कि टेस्ट में हम तीन चीजें देखते हैं। वह बल के प्रति कितना समर्पित है। उसका फोकस क्या है, उसकी मानसिकता क्या दर्शाती है। टेस्ट के बाद हम उम्मीद कर सकते हैं कि वह जासूसी, हनीट्रैप जैसे मामलों में नहीं फंसेगा। उन्होंने कहा, इससे जवानों के बीच में सेना छोड़ने की घटनाएं भी कम होंगी।
सैन्य बल के अधिकारी भी दायरे में आएंगे
सैन्य बलों में अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया में कई तरह के परीक्षण शामिल होते हैं। लेकिन स्पष्ट रूप से वफादारी परीक्षा जैसी कोई व्यवस्था अभी नहीं है। सूत्रों का कहना है कि जिस प्रकार अधिकारियों के भी जासूसी और हनीट्रैप में फंसने के मामले आ रहे हैं, आगे नए भर्ती होने वाले अधिकारियों को इस प्रक्रिया से गुजारा जा सकता है।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार सभी बलों में भर्ती होने वाले जवानों के लिए इस व्यवस्था को लागू किया जा रहा है। हाल में वायुसेना में जवानों की भर्ती के लिए इसका क्रियान्वयन शुरू कर दिया गया है। सूत्रों का दावा है कि अगले चरण में थल सेना एवं नौसेना में भी भर्ती के नियमों में आवश्यक बदलाव कर इसे शामिल किया जाएगा।
वायुसेना से जुड़े सूत्रों ने कहा कि लिखित परीक्षा पास करने, चिकित्सकीय परीक्षा पूरी होने के बाद तीसरे चरण में उम्मीदवारों को एक विशेषज्ञ पैनल के समक्ष पेश होना पड़ता है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी तथा मानसिक विशेषज्ञ भी मौजूद रहते हैं, उसमें जवानों से खासतौर से ऐसे सवाल-जवाब किए जाते हैं, जिससे सैन्य बलों में शामिल होने का उसका मकसद जाना जा सके। प्रश्नों के जरिये ही यह भी परखा जाता है कि क्या वह पैसे की लालच में या हनी ट्रैप में फंस सकता है या नहीं।
एक अधिकारी ने बताया कि टेस्ट में हम तीन चीजें देखते हैं। वह बल के प्रति कितना समर्पित है। उसका फोकस क्या है, उसकी मानसिकता क्या दर्शाती है। टेस्ट के बाद हम उम्मीद कर सकते हैं कि वह जासूसी, हनीट्रैप जैसे मामलों में नहीं फंसेगा। उन्होंने कहा, इससे जवानों के बीच में सेना छोड़ने की घटनाएं भी कम होंगी।
सैन्य बल के अधिकारी भी दायरे में आएंगे
सैन्य बलों में अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया में कई तरह के परीक्षण शामिल होते हैं। लेकिन स्पष्ट रूप से वफादारी परीक्षा जैसी कोई व्यवस्था अभी नहीं है। सूत्रों का कहना है कि जिस प्रकार अधिकारियों के भी जासूसी और हनीट्रैप में फंसने के मामले आ रहे हैं, आगे नए भर्ती होने वाले अधिकारियों को इस प्रक्रिया से गुजारा जा सकता है।

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