तापमान
में बढ़ोतरी का सबसे बुरा प्रभाव गंगा घाटी क्षेत्र में पड़ सकता है। जलवायु
परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (आईपीसीसी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यदि
औसत तापमान में दो डिग्री बढ़ोतरी होती है तो यूपी, बिहार जैसे गंगा घाटी
वाले राज्यों में बारिश में 20 फीसदी की कमी आ सकती है। बारिश में 20
फीसदी की कमी का मतलब सूखा पड़ना होता है।
आईपीसीसी की सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया कि वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में 50 फीसदी कमी लानी होगी। वरना सदी के आखिर तक तापमान में बढ़ोतरी दो डिग्री या इससे ज्यादा हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति पूरी दुनिया के लिए खतरनाक है। लेकिन इसमें भारत और दक्षिणपूर्व एशिया का अलग से संदर्भ लेते हुए कहा गया है कि इन देशों के लिए स्थिति ज्यादा चिंताजनक है।
रिपोर्ट में कहा गया, यदि तापमान में बढ़ोतरी दो डिग्री होती है तो इससे गंगा घाटी वाले राज्यों में बारिश में 20 फीसदी तक की कमी आ सकती है। उत्तरप्रदेश, हिमाचल, उत्तराखंड, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, मध्यप्रदेश, बिहार, झारखंड और आंशिक रूप से पश्चिम बंगाल इन राज्यों में शामिल हैं। देश में सबसे उपजाऊ माना जाने वाला गंगा घाटी क्षेत्र पहले ही कम बारिश और बाढ़ की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में यह रिपोर्ट और भी चिंताएं पैदा करती है।
आईपीसीसी की सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया कि वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में 50 फीसदी कमी लानी होगी। वरना सदी के आखिर तक तापमान में बढ़ोतरी दो डिग्री या इससे ज्यादा हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति पूरी दुनिया के लिए खतरनाक है। लेकिन इसमें भारत और दक्षिणपूर्व एशिया का अलग से संदर्भ लेते हुए कहा गया है कि इन देशों के लिए स्थिति ज्यादा चिंताजनक है।
रिपोर्ट में कहा गया, यदि तापमान में बढ़ोतरी दो डिग्री होती है तो इससे गंगा घाटी वाले राज्यों में बारिश में 20 फीसदी तक की कमी आ सकती है। उत्तरप्रदेश, हिमाचल, उत्तराखंड, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, मध्यप्रदेश, बिहार, झारखंड और आंशिक रूप से पश्चिम बंगाल इन राज्यों में शामिल हैं। देश में सबसे उपजाऊ माना जाने वाला गंगा घाटी क्षेत्र पहले ही कम बारिश और बाढ़ की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में यह रिपोर्ट और भी चिंताएं पैदा करती है।
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