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गुजरात में हिंदीभाषियों के साथ अत्याचार के घाव लंबे समय तक याद रहेंगे

गुजरात में हिंदीभाषियों के साथ अत्याचार के घाव लंबे समय तक याद रहेंगे

इस घटनाक्रम से जुड़ा सबसे खराब दौर बीत चुका है लेकिन घटना ने जो जख्म दिए हैं उन्हें भरने में कुछ और वक्त लगेगा.

 

रविवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुजरात के सीएम विजय रुपाणी से बात की और अपनी चिंता का इजहार किया कि उनके प्रदेश के प्रवासियों को गुजरात छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
हालात की गंभीरता को समझने और यह जानने के लिए की राज्य की एजेंसियां स्थिति से कैसे निपट रही हैं, नीतीश कुमार ने रुपाणी से बात करने के पहले गुजरात के मुख्य सचिव जेएन सिंह से फोन पर बात की. गुजरात के पुलिस महानिदेशक की ही तरह जेएन सिंह भी बिहार के हैं. किसी एक राज्य के मुख्यमंत्री का दूसरे राज्य के मुख्य सचिव से बात करना प्रचलित राजनीतिक शिष्टाचार के हिसाब से कोई सामान्य बात नहीं लेकिन असामान्य हालात असामान्य उपायों की मांग करते हैं. नीतीश कुमार का पक्ष बहुत सीधा सा है कि बलात्कार के मामले के दोषी व्यक्ति को हरगिज न छोड़ा जाए लेकिन बिहार और यूपी के बाकी लोगों के प्रति पूर्वाग्रह से भरा बरताव नहीं होना चाहिए.
बिहार के मुख्यमंत्री ने भांप लिया है कि अप्रवासी मजदूरों तथा रेहड़ी-पटरीवालों के बिहार लौटने की भारी सामाजिक कीमत चुकानी पड़ सकती है. संसद के चुनाव बस छह महीने दूर हैं और ऐसे में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी खास अहमियत रखता है. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने भी यही स्थिति है. नीतीश कुमार की तरह इन दोनों ने भी रुपाणी से फोन पर बात की है.
यूपी के सूचना विभाग की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में बताया गया है कि गुजरात के मुख्यमंत्री ने यूपी के मुख्यमंत्री से कहा है कि बीते तीन दिनों में कोई भी अवांछित घटना नहीं हुई है और राज्य की एजेंसियां इस बात को सुनिश्चित करेंगी कि हर व्यक्ति सुरक्षित रहे तथा अपना जीवन गरिमापूर्वक जी सके. योगी का तर्क था कि गुजरात एक अमनपसंद और विकास का मॉडल राज्य है लेकिन जो लोग इसके विरोधी हैं वे माहौल में जहर घोलने की कोशिश कर रहे हैं

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात से हैं लेकिन उन्होंने 2014 में यूपी की बनारस संसदीय सीट से चुनाव लड़ा. एक तरह से देखें तो उन्होंने यूपी को अपने दूसरे गृह-प्रदेश के रूप में चुना है, कम से कम राजनीतिक उद्देश्य के अर्थ में ऐसा कहा जा सकता है.
गुजरात के मुख्यमंत्री के लिए हालात फिलहाल उलझाऊ हैं. उनके सामने एक बलात्कार का मामला है जिसमें पीड़िता नाबालिग है और मामले के आरोपी के खिलाफ भड़के लोगों के गुस्से को उन्हें शांत करना है भले ही यह गुस्सा असली हो या फिर रुपाणी के राजनीतिक प्रतिद्वन्द्वियों के हाथों उकसाया हुआ. उन्हें सुनिश्चित करना होगा कि दोषी को सजा मिले, साथ ही उन्हें यह भी देखना होगा कि जो लोग मध्य भारत या पूर्वी भारत से आए अप्रवासियों के खिलाफ हैं उन्हें अंकुश में रखने में बल-प्रयोग न हो. उनके साथ सख्ती का बरताव न किया जाए.
आरोपी को जल्दी ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था लेकिन जो लोग बाहर के राज्यों से आए लोगों के खिलाफ गुस्सा भड़काना चाह रहे हैं उनके साथ सख्ती का बरताव किया गया तो इससे लोगों में और भी ज्यादा गुस्सा उबल सकता है. इसी कारण शुरुआत में गुजरात की सरकार ने ऐसे लोगों के खिलाफ नरमी का रवैया अपनाया.
लेकिन बाद में मसला राष्ट्रीय मुद्दा बन गया. बिहार, यूपी, मध्यप्रदेश से आए अप्रवासी जो ज्यादातर फैक्ट्रियों में मजदूर या फिर रेहड़ी-पटरीवाले के तौर पर काम करते हैं मजबूरन गुजरात छोड़कर जाने लगे. घर लौटने के लिए ठसाठस भरी बसों तथा ट्रेन के डिब्बे में उनके सवार होने की तस्वीरें मीडिया में छा गईं. दुख और परेशानी की हालत में राज्य छोड़ने पर मजबूर हो रहे लोगों की कहानियां बेहद परेशान करने वाली हैं. अपने देश में होने के बावजूद ये लोग दूसरे राज्य में अवांछित मान लिए गए हैं. मध्यप्रदेश में चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है. इसके तुरंत बाद संसद के चुनावों की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. बीजेपी के लिए ऐसे हालात का जारी रहना ठीक नहीं.
गुजरात के गृहमंत्री प्रदीप सिंह जडेजा का कहना है कि वे राज्य में जारी घटनाओं के बारे में केंद्र सरकार को लगातार खबर दे रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह दोनों ही नहीं चाहेंगे कि हालात बेकाबू हों. शुरुआत में थोड़ा पसोपेश रहा कि स्थिति से कितनी सख्ती के साथ निबटा जाए लेकिन शुरुआती पसोपेश से उबरते हुए गुजरात सरकार ने लोगों में फूट डालने, क्षेत्रवाद की संकीर्ण भावना और हिंसा भड़काने पर तुले लोगों के साथ सख्ती बरताव किया. हालात को काबू में लाना था. लगभग 350 गिरफ्तारियां हुई हैं.
गुजरात के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा है कि अल्पेश ठाकोर, ठाकोर सेना (माना जा रहा है कि इस सेना को अल्पेश ठाकोर ने उकसाया) तथा कुछ कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने लोगों में नफरत और हिंसा की चिंगारी भड़काई. अल्पेश ठाकौर के खिलाफ तो कोई कार्रवाई नहीं हुई है लेकिन कांग्रेस के कार्यकर्ता गिरफ्तार किए गए हैं.
बीजेपी के राष्ट्रीय और सूबाई नेतृत्व के मन में यह बात साफ हो चली थी कि राज्य में एक और पाटीदार आंदोलन जैसी सूरत नहीं उभरने देनी है. राज्य की बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि पाटीदार आंदोलन और अभी जो गड़बड़ी की स्थिति पैदा हुई है, दोनों ही की मूल वजह गुजराती लोगों के दिमाग में दबे-ढंके पहले से मौजूद रही है और यह मूल वजह है- नौकरी.
गुजरात में एक वक्त तक लोगों को लगता रहा कि बिहार और यूपी के अप्रवासी सिर्फ वो ही नौकरी हासिल करते हैं जिन्हें गुजरात के स्थानीय लोग नहीं करना चाहते. लेकिन अभी नौकरियों के मामले में तंगी की हालत है और ऐसे में किसी व्यक्ति या समूह के लिए मसले पर दूसरे राज्यों से आए लोगों के खिलाफ गुस्सा भड़काना बहुत आसान है. अभी की समस्या में इस सोच की भी एक भूमिका है.
गुजरात में ऐसे बहुत लोग हैं जो अप्रवासी लोगों के खिलाफ गुस्सा भड़काने वाले लोगों से खफा हैं. यह नवरात्रि और दिवाली से तुरंत पहले का वक्त है और ऐसे वक्त में हर किस्म के उत्पादन और व्यवसाय में तेजी रहनी चाहिए लेकिन त्यौहारी मौसम से ऐन पहले के समय में व्यवसाय में बाधा उत्पन्न हो रही है. व्यावसायिक और औद्योगिक ठिकानों में लूट और दंगे जैसी स्थिति गुजरात के लिए अनजानी है. कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़े तो व्यवसायी वर्ग सरकार को अर्जी देता है और सरकार हालत पर काबू में लाती है.
कानून और व्यवस्था की स्थिति का बने रहना पिछले डेढ़ दशक से गुजरात की एक खास पहचान रहा है. बलात्कार की दुर्भाग्यपूर्ण घटना इसी वजह से किसी सदमे से कम नहीं. लूट की घटनाओं से भी एक बदरंग तस्वीर उभरी है.
जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनमें ज्यादातर पर दंगे और डकैती के जुर्म में आयद की जाने वाली धाराएं लगाई गई हैं. सो, गिरफ्तार लोगों के लिए जमानत लेना और जेल से छूटना आसाना कतई नहीं होने वाला.

गुजरात तथा इस सूबे के बाहर के लोगों में विश्वास बहाली के लिए गुजरात के गृहमंत्री, पुलिस महानिदेशक तथा गृह सचिव ने एक विस्तृत प्रेस-कांफ्रेंस की है. मुख्य सचिव ने सभी जोनल कमिश्नर तथा डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट्स के साथ वीडियो कांफ्रेंस की है. मुख्मंत्री ने खुद ही मीडिया के सामने आकर कहा कि स्थिति को किस तरह संभाल लिया गया है और उन्होंने अपने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील भी की है.
इस घटनाक्रम से जुड़ा सबसे खराब दौर बीत चुका है लेकिन घटना ने जो जख्म दिए हैं उन्हें भरने में कुछ और वक्त लगेगा.

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महात्मा गांधी   मोहनदास करमचन्द गांधी जन्म २ अक्टूबर १८६९ पोरबंदर , काठियावाड़ , गुजरात , भारत मृत्यु ३० जनवरी १९४८ (७८ वर्ष की आयु में) नई दिल्ली , भारत मृत्यु का कारण हत्या राष्ट्रीयता भारतीय अन्य नाम राष्ट्रपिता, महात्मा, बापू, गांधीजी शिक्षा यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन प्रसिद्धि कारण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, सत्याग्रह, अहिंसा, शांति राजनैतिक पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस हस्ताक्षर मोहनदास करमचन्द गांधी ( २ अक्टूबर १८६९ - ३० जनवरी १९४८ ) भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह (व्यापक सविनय अवज्ञा) के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे, उनकी इस अवधारणा की नींव सम्पूर्ण अहिंसा के सिद्धान्त पर रखी गयी थी जिसने भारत को आजादी दिलाकर पूरी दुनिया में जनता के नागरिक अधिकारों एवं स्वतन्त्रता के प्रति आन्दोलन के लिये प्रेरित किया। उन्हें दुनिया में आम जनता महात्मा गांधी के नाम से जानती है। संस्कृत भाषा में महात्मा अथवा महान आत...