भारतीय कप्तान विराट कोहली ने कहा कि
दुनिया भर में टेस्ट क्रिकेट इंग्लैंड में बनी ड्यूक गेंद से खेला जाना
चाहिए। उन्होंने एसजी गेंदों की खराब गुणवत्ता पर नाखुशी जताई है। गौर करने
वाली बात यह है कि बीसीसीआई भी भारत होने वाले मैचों में एसजी गेंद का ही
उपयोग करता है। विराट कोहली ने वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच से
पहले संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'मेरा मानना है कि ड्यूक गेंद टेस्ट
क्रिकेट के लिए सबसे उपयुक्त है। मैं दुनिया भर में इस गेंद के इस्तेमाल की
सिफारिश करूंगा। इसकी सीम कड़ी और सीधी है। इस गेंद में निरंतरता बनी रहती
है।'
गेंदों के इस्तेमाल को लेकर ICC ने नहीं बनाया है कोई नियम
गौरतलब है कि गेंद के इस्तेमाल को लेकर आईसीसी की तरफ से कोई स्पेशल गाइडलाइन्स नहीं हैं और हर देश अलग तरह की गेंदों का उपयोग करता है। भारत स्वदेश में बनी एसजी गेंदों का इस्तेमाल करता है। इंग्लैंड और वेस्टइंडीज ड्यूक जबकि आॅस्ट्रेलिया, पाकिस्तान और श्रीलंका कूकाबूरा का उपयोग करते हैं। कोहली से पहले ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने कहा था कि वह एसजी की तुलना में कूकाबूरा से गेंदबाजी करते हुए अधिक बेहतर महसूस करते हैं। अश्विन की शिकायत के बारे में पूछे जाने पर कोहली ने इस स्पिनर का समर्थन किया।
विराट कोहली से पहले रविचंद्रन अश्विन भी जता चुके हैं असंतोष
गौरतलब है कि गेंद के इस्तेमाल को लेकर आईसीसी की तरफ से कोई स्पेशल गाइडलाइन्स नहीं हैं और हर देश अलग तरह की गेंदों का उपयोग करता है। भारत स्वदेश में बनी एसजी गेंदों का इस्तेमाल करता है। इंग्लैंड और वेस्टइंडीज ड्यूक जबकि आॅस्ट्रेलिया, पाकिस्तान और श्रीलंका कूकाबूरा का उपयोग करते हैं। कोहली से पहले ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने कहा था कि वह एसजी की तुलना में कूकाबूरा से गेंदबाजी करते हुए अधिक बेहतर महसूस करते हैं। अश्विन की शिकायत के बारे में पूछे जाने पर कोहली ने इस स्पिनर का समर्थन किया।
विराट कोहली से पहले रविचंद्रन अश्विन भी जता चुके हैं असंतोष
कोहली ने कहा, 'मैं पूरी तरह से उनसे सहमत हूं। पांच ओवर में एसजी गेंद घिस जाती है। ऐसा हमने पहले कभी नहीं देखा था। पहले जिस गेंद का उपयोग किया जाता था उसकी गुणवत्ता काफी अच्छी थी और मुझे नहीं पता कि अब इसमें गिरावट क्यों आयी है। ड्यूक गेंद अब भी अच्छी गुणवत्ता वाली होती है। कूकाबूरा भी अच्छी गुणवत्ता की होती हैं। कूकाबूरा की जो भी सीमाएं (सीम सपाट हो जाना) है लेकिन उसकी गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं किया जाता है।'

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