देश की सड़कों पर अवैध डीएल वाले ड्राइवरों के चलते एक साल में सड़क
हादसों में 50 फीसदी से अधिक इजाफा हुआ है। 2017 में 48 हजार से अधिक सड़क
हादसे करने वाले ड्राइवरों के पास वैध डीएल नहीं पाया गया। वहीं, दूसरी ओर
नौसिखिया ड्राइवरों (लर्निंग लाइसेंस) से भी वाहन चालक बचके रहें। सुरक्षित
सड़कों के लिए अवैध डीएल वाले व नौसिखिया दोनों ड्राइवर घातक साबित हो रहे
हैं।
सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने पिछले हफ्ते भारत में सड़क दुर्घटनाएं 2017 के आंकड़े पेश किए। इसमें चिंता वाली बात यह है कि 2016 में अवैध डीएल वाले ड्राइवरों के कारण 32,088 सड़क हादसे हुए। जबकि 2017 में यह बढ़कर 48503 हो गए। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, गत वर्ष की अपेक्षा अवैध डीएल धारकों के कारण सड़क हादसों में 50 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी हुई है। इस रिपोर्ट में मंत्रालय ने उल्लेख किया है कि सुगम यातायात और सुरक्षित सड़क के लिए अप्रशिक्षित व अवैध डीएल धारक ड्राइवर बड़ा रोड़ा बने हुए हैं।
मंत्रालय के अनुसार, इसकी रोकथाम के लिए कानून को प्रभावशाली तरीके से
लागू करने की जरूरत है। जिससे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) से अवैध
डीएल बनवाने के धंधे पर रोक लग सके। रिपोर्ट में 2017 में लर्निंग लाइसेंस
धारक ड्राइवरों ने 33,128 सड़क हादसों को अंजाम दिया। हालांकि गत वर्ष की
अपेक्षाकृत यह आंकड़े थोड़ा कम है। 2016 में लर्निंग लाइसेंस वाले ड्राइवरों
ने 41405 हादसों को अंजाम दिया था। परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि
रिपोर्ट में नौसिखिया व अवैध डीएल धारकों से होने वाले सड़क हादसों में
मृतकों की संख्या का जिक्र नहीं किया गया। लेकिन हादसों में 50 फीसदी
बढ़ोतरी देखकर दूसरे वाहन चालकों के लिए खतरे की घंटी जरूर माना जा सकता है।
विदित हो कि 2017 में कुल 4 लाख 64 हजार 910 सड़क हादसे हुए। इसमें 17.5
फीसदी के लिए उक्त ड्राइवर जिम्मेदार है।
आरटीओ कार्यालय में स्टाफ की भारी कमी
परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि डीएल बनवाने के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यायलों (आरटीओ) में बुनियादी ढांचे व स्टाफ की भारी कमी है। आरटीओ में प्रति इंस्पेक्टर को 300 से अधिक लर्निंग डीएल बनाने पड़ते हैं। परिवहन विशेषज्ञ अनिल चिकारा का कहना है कि वाहनों को ट्रैक पर चलवाने, अंग्रेजी के एस नुमा फार्मेशन पर रिवर्स गेयर में गाड़ी चलाने, वाहन के सामानांतर पार्किंग, चढ़ाई पर गाड़ी चलवाने व आंखों की जांच व कंप्यूटर टेस्ट आदि करने में इंस्पेक्टर अधिकतम 40 से अधिक लर्निंग डीएल जारी नहीं कर सकता है। इसके अलावा वाहन चलाने के लिए ट्रैक व मशीनें उपलब्ध नहीं है।

सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने पिछले हफ्ते भारत में सड़क दुर्घटनाएं 2017 के आंकड़े पेश किए। इसमें चिंता वाली बात यह है कि 2016 में अवैध डीएल वाले ड्राइवरों के कारण 32,088 सड़क हादसे हुए। जबकि 2017 में यह बढ़कर 48503 हो गए। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, गत वर्ष की अपेक्षा अवैध डीएल धारकों के कारण सड़क हादसों में 50 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी हुई है। इस रिपोर्ट में मंत्रालय ने उल्लेख किया है कि सुगम यातायात और सुरक्षित सड़क के लिए अप्रशिक्षित व अवैध डीएल धारक ड्राइवर बड़ा रोड़ा बने हुए हैं।
आरटीओ कार्यालय में स्टाफ की भारी कमी
परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि डीएल बनवाने के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यायलों (आरटीओ) में बुनियादी ढांचे व स्टाफ की भारी कमी है। आरटीओ में प्रति इंस्पेक्टर को 300 से अधिक लर्निंग डीएल बनाने पड़ते हैं। परिवहन विशेषज्ञ अनिल चिकारा का कहना है कि वाहनों को ट्रैक पर चलवाने, अंग्रेजी के एस नुमा फार्मेशन पर रिवर्स गेयर में गाड़ी चलाने, वाहन के सामानांतर पार्किंग, चढ़ाई पर गाड़ी चलवाने व आंखों की जांच व कंप्यूटर टेस्ट आदि करने में इंस्पेक्टर अधिकतम 40 से अधिक लर्निंग डीएल जारी नहीं कर सकता है। इसके अलावा वाहन चलाने के लिए ट्रैक व मशीनें उपलब्ध नहीं है।

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