
साहब! मुझे लाइन हाजिर कर दिया जाए या पुलिस ऑफिस से संबद्ध कर दें। 24 साल से पुलिस विभाग में मेरा शोषण हो रहा है। चौकी इंचार्ज होने के बावजूद मुझे एक भी हमराही नहीं दिया जा रहा है। इसके चलते करीब दो दर्जन जांचें (विवेचनाएं) प्रभावित हैं। सजा के तौर पर स्थानांतरण नीति का उल्लंघन करते हुए मेरा एक साल में सात बार ट्रांसफर किया गया। सीनियर होने के बाद भी जूनियर के अंडर में काम करने से मानसिक तनाव में हूं। यह दर्द नवाबगंज थाने की गंगा बैराज चौकी इंचार्ज अशोक कुमार ने ने बयां किया है। 16 बिंदुओं पर अपनी समस्याओं का पत्र एसएसपी को भेजा तो विभाग में हड़कंप मच गया।
पत्र मिलते ही एसएसपी अनंत देव ने तत्काल प्रभाव से अशोक कुमार को रिजर्व पुलिस लाइन भेज दिया। इसके साथ ही मामले में जांच भी बैठा दी। एलआईयू को भी जांच के लिए लगा दिया है ताकि इस प्रकरण से पुलिस में विरोध का बीज न फूटने पाए। दरोगा की एक-एक हरकत पर पुलिस और एलआईयू गोपनीय रूप से निगाह बनाए हुए है। एसपी पश्चिम संजीव सुमन भी जांच कर रहे हैं। इस बात की भी जांच की जा रही है कि अशोक द्वारा लगाए गए आरोप कितने सही हैं। इसके साथ ही काउंसिलिंग करके दरोगा की दिक्कतों को दूर करने का प्रयास हो रहा है। चर्चा है कि अशोक के पक्ष में कई दरोगा और सिपाही खड़े हो गए हैं जिससे पुलिस महकमे में खासी बेचैनी है।
- उत्पीड़न करने के लिए मशीन की तरह 16 से अधिक घंटे काम लिया जा रहा है जिससे प्रार्थी तनावग्रस्त है।
-उत्पीड़न स्वरूप ही कभी थाने का चार्ज नहीं दिया गया। जबकि प्रार्थी की सेवा संतोषजनक, उत्तम और अति उत्तम होने के साथ ही सराहनीय है।
-उत्पीड़न स्वरूप ही ट्रांसफर नीति का उल्लंघन करते हुए एक साल में सात बार किया गया।
-प्रार्थी की 13 साल की नौकरी पूरी होने के बाद भी प्रथम प्रोन्नत वेतनमान व निरीक्षक पद का वेतन नहीं दिया जा रहा है।
-वेतन विसंगतियों समेत अन्य मामलों की कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
-8 घंटे की ड्यूटी होने के बाद भी 16 घंटे की नौकरी और विषम परिस्थितियों में 24 घंटे ड्यूटी ली जा रही है।
-कार्यस्थल पर कूलर, पंखा, पेयजल आदि मूलभूत सुविधाएं नहीं देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
-सरकारी कार्य में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई मिलती है लेकिन उल्लेखनीय कार्य में कभी प्रोत्साहन नहीं मिला।
-प्रार्थी की वरिष्ठता को अनदेखा करते हुए बार-बार जूनियरों के अंडर में काम करना पड़ रहा है।
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