दशहरा 2018: नोएडा के इस गांव में बीता था राणव का बचपन, पुतला फूंकना है वर्जित

दशहरा पर जहां पूरे देश में रावण के पुतले जलाए जाएंगे, वहीं बिसरख में ऐसा करना वर्जित है। मान्यता है कि रावण का जन्म बिसरख में हुआ था। उनके पिता महर्षि विश्रवा का आश्रम यहीं था। गांव में एक शिव मंदिर है। जो ‘रावण का मंदिर' नाम से विख्यात है।
इस प्राचीन शिव मंदिर के महंत राम दास ने बताया कि लंका नरेश इस गांव में पैदा हुए थे। इस मंदिर को रावण मंदिर के नाम से जाना जाता है। रावण का जन्म ऋषि विश्रवा के यहां हुआ था। उनका बचपन बिसरख में बीता था।
रावण मंदिर में एक शिवलिंग हैं, जो आठ भुजाओं वाला है। राजवीर सिंह भाटी ने बताया कि इसे अष्टभुजा शिव कहा जाता है। इसकी स्थापना महर्षि विश्रवा ने की थी। यहां रावण की मूर्ति स्थापित करने पर विवाद हुआ था।
दशहरा 2018: भारत के इन मंदिरों में होती है रावण की पूजा, जानिए क्या है वजह
मंदसौर: यहां रावण की पूजा की जाती है। मंदसौर नगर के खानपुरा क्षेत्र में रूण्डी पर रावण की मूर्ति है।
उज्जैन: चिखली ग्राम में मान्यता है कि रावण की पूजा नहीं करने पर गांव जलकर भस्म हो जाएगा।
विदिशा : विदिशा के नटेरन के रावण गाँव में देवता मानकर पूजा होती है।
जोधपुर: जोधपुर में रावण की ससुराल है। वो यहां का दामाद है।
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