SC-ST एक्ट को लेकर भाजपा ने खेला बड़ा दांव, 2019 में मिल सकती है एकतरफा जीत priyanka SC-ST एक्ट को लेकर भाजपा ने खेला बड़ा दांव, 2019 में मिल सकती है एकतरफा जीत Third party image reference वर्तमान समय में भाजपा सरकार के द्वारा जारी किए गए एससी एसटी एक्ट को लेकर काफी ज्यादा बवाल मचा हुआ है। बताते चलें कि केंद्र सरकार के द्वारा लागू किए गए एससी एसटी एक्ट के विरोध को सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक देखा जा सकता है। हालांकि इस बात की भनक भारतीय जनता पार्टी को भी है कि भाजपा का कैडर वोट बैंक वर्तमान समय में उनसे नाराज चल रहा है। Third party image reference लेकिन आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव 2014 में भारतीय जनता पार्टी के एक तरफा जीत में SC- ST का एक मुख्य सहयोग रहा था। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि लोकसभा चुनाव 2014 में SC-ST की सबसे मुख्य पार्टी बहुजन समाजवादी पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी। ऐसे में भाजपा किसी भी कीमत पर अपने SC-ST वोटर को पुनः महागठबंधन में जाने नहीं दे सकती। इसी के चलते गुजरात चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी ने रामनाथ कोविंद को देश का राष्ट्रपति बना दिया। जिसका असर यह हुआ कि गुजरात में राहुल गांधी, हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवाड़ी के घोर विरोध के बावजूद गुजरात में भाजपा की ही सरकार बनी। Third party image reference अब ऐसे में यह तो निश्चित है कि भाजपा SC-ST वोट को किसी भी कीमत पर महागठबंधन में जाने नहीं देना चाहती। इसके अलावा भाजपा यह भी जानती है कि एससी एसटी एक्ट को लेकर महागठबंधन एवं अन्य विपक्षी दल कभी भी सड़कों पर नहीं उतरेंगे। तथा पर्दे के पीछे ही रहकर अपनी राजनीति करेंगे। हालांकि खबरें यह भी आ रही हैं कि भाजपा अपने मूल वोटर यानी सवर्ण समाज को खुश करने के लिए पर्दे के पीछे एक बड़ी रणनीति बना रही है। Third party image reference बताते चलें कि यह बात तो सभी को पता है कि भाजपा अपनी चुनावी रणनीति को काफी समय पहले से ही बना लेती है। ऐसे में यह खबरें और भी अधिक पुख्ता लग रही हैं कि केंद्र सरकार सवर्ण समाज के लिए आरक्षण में आरक्षण की योजना जल्द ही लागू कर सकती है। जिसके चलते सवर्ण समाज को एक बड़ा लाभ होगा तथा उसका मूल वोट बैंक भी उसके पास वापस चला जाएगा। ऐसे में महागठबंधन को एक बार फिर से करारी क्या एससी एसटी एक्ट में भारतीय जनता पार्टी की हार का सबसे बड़ा कारण बनेगा या नहीं आप हमें कमेंट बॉक्स में जरुर बताएं साथी हमारे चैनल को फॉलो करें हार का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि सवर्ण समाज के लिए इस रणनीति की किसी भी प्रकार से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
SC-ST एक्ट को लेकर भाजपा ने खेला बड़ा दांव, 2019 में मिल सकती है एकतरफा जीत
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वर्तमान समय में भाजपा सरकार के द्वारा जारी किए गए एससी एसटी एक्ट को लेकर काफी ज्यादा बवाल मचा हुआ है। बताते चलें कि केंद्र सरकार के द्वारा लागू किए गए एससी एसटी एक्ट के विरोध को सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक देखा जा सकता है। हालांकि इस बात की भनक भारतीय जनता पार्टी को भी है कि भाजपा का कैडर वोट बैंक वर्तमान समय में उनसे नाराज चल रहा है।
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लेकिन आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव 2014 में भारतीय जनता पार्टी के एक तरफा जीत में SC- ST का एक मुख्य सहयोग रहा था। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि लोकसभा चुनाव 2014 में SC-ST की सबसे मुख्य पार्टी बहुजन समाजवादी पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी। ऐसे में भाजपा किसी भी कीमत पर अपने SC-ST वोटर को पुनः महागठबंधन में जाने नहीं दे सकती। इसी के चलते गुजरात चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी ने रामनाथ कोविंद को देश का राष्ट्रपति बना दिया। जिसका असर यह हुआ कि गुजरात में राहुल गांधी, हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवाड़ी के घोर विरोध के बावजूद गुजरात में भाजपा की ही सरकार बनी।
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अब ऐसे में यह तो निश्चित है कि भाजपा SC-ST वोट को किसी भी कीमत पर महागठबंधन में जाने नहीं देना चाहती। इसके अलावा भाजपा यह भी जानती है कि एससी एसटी एक्ट को लेकर महागठबंधन एवं अन्य विपक्षी दल कभी भी सड़कों पर नहीं उतरेंगे। तथा पर्दे के पीछे ही रहकर अपनी राजनीति करेंगे। हालांकि खबरें यह भी आ रही हैं कि भाजपा अपने मूल वोटर यानी सवर्ण समाज को खुश करने के लिए पर्दे के पीछे एक बड़ी रणनीति बना रही है।
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बताते चलें कि यह बात तो सभी को पता है कि भाजपा अपनी चुनावी रणनीति को काफी समय पहले से ही बना लेती है। ऐसे में यह खबरें और भी अधिक पुख्ता लग रही हैं कि केंद्र सरकार सवर्ण समाज के लिए आरक्षण में आरक्षण की योजना जल्द ही लागू कर सकती है। जिसके चलते सवर्ण समाज को एक बड़ा लाभ होगा तथा उसका मूल वोट बैंक भी उसके पास वापस चला जाएगा। ऐसे में महागठबंधन को एक बार फिर से करारी क्या एससी एसटी एक्ट में भारतीय जनता पार्टी की हार का सबसे बड़ा कारण बनेगा या नहीं आप हमें कमेंट बॉक्स में जरुर बताएं साथी हमारे चैनल को फॉलो करें हार का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि सवर्ण समाज के लिए इस रणनीति की किसी भी प्रकार से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।




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