मुजफ्फरपुर हत्याकांड पर बोले तेजस्वी, बिहार में पुलिस से ज्यादा अपराधियों के पास AK 47
बदमाशों ने जिस तरह से 3 दिन में तीनों नेताओं-कार्यकर्ताओं की हत्या की है उससे बिहार में 90 के दशक के अपराध के दौर की याद ताजा हो जाती है. जब अपराधी बदला लेने के लिए इसी तरह ऑटोमैटिक हथियारों से सरेआम हत्याएं कर देते थे

बिहार में बीते 3 दिन में अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के 3 नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या से हड़कंप मच गया है. सरेआम हुई इन हत्याओं से पुलिस विभाग की नींद उड़ गई है.
इनमें सबसे ज्यादा चर्चित मुजफ्फरपुर के पूर्व मेयर समीर कुमार की हत्या है. रविवार देर शाम एके 47 ऑटोमैटिक हथियारों से लैस दो बाइक सवार अपराधियों ने उनके साथ उनके ड्राइवर की भी गोली मारकर हत्या कर दी थी.
समीर कुमार की हत्या से कुछ घंटे पहले पड़ोस के जिले समस्तीपुर में एक बीजेपी कार्यकर्ता सुनील कुमार की हत्या कर दी गई.
जबकि शुक्रवार को, पटना के कोतवाला थाना क्षेत्र में तबरेज आलम उर्फ फिरोज की हत्या कर दी गई. तबरेज ने पूर्व में समाजवादी पार्टी के टिकट पर जहानाबाद से चुनाव लड़ने का दावा किया था. वो जेल में बंद सीवान के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के शूटर के तौर पर भी काम कर चुका है.
बदमाशों ने जिस तरह से इन तीनों नेताओं-कार्यकर्ताओं की हत्या की है उससे बिहार में 90 के दशक के अपराध के दौर की याद ताजा हो जाती है. जब अपराधी बदला लेने के लिए इसी तरह ऑटोमैटिक हथियारों से सरेआम हत्याएं कर देते थे.

मुजफ्फरपुर के पूर्व मेयर समीर कुमार की गाड़ी पर एके 47 से लैस अपराधियों ने 16 से ज्यादा गोलियां चलाई थीं (फोटो: ट्विटर से साभार)
विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने राज्य की लगातार गिरती कानून व्यवस्था के लिए नीतीश सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'बिहार में अब अपराधियों के पास पुलिस से ज्यादा एके 47 हथियार हैं.'घटना के दो दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस अपराधियों को अब तक ढूंढ नहीं पाई है. मुजफ्फरपुर की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) हरप्रीत कौर ने न्यूज़18 से कहा कि वारदात के पीछे प्रॉपर्टी विवाद हो सकता है. उन्होंने कहा, ऐसा लगता है कि संपत्ति विवाद में इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया है. इसकी जांच जारी है.
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